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जब बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤› खा नहीं पाता, तो दूध ही उसके लिठसà¤à¥€ तरह के पोषण पाने का जरिया होता है। à¤à¤¸à¥‡ में कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि कà¥à¤¯à¤¾ मां के दूध के अलावा, बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध à¤à¥€ पिलाया जा सकता है? कà¥à¤¯à¤¾ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गाय के दूध से सारे पोषण मिलते हैं? आपके जहन में उठने वाले à¤à¤¸à¥‡ सà¤à¥€ सवालों के जवाब हम मॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ के इस लेख में देंगे। यहां आप जानेंगे कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गाय का दूध कब और कितनी मातà¥à¤°à¤¾ में देना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है और उसके फायदे कà¥à¤¯à¤¾ हैं। साथ ही यह à¤à¥€ बताà¤à¤‚गे कि गाय का दूध पीने के नà¥à¤•सान होते हैं या नहीं।
आइà¤, सबसे पहले आपको बताà¤à¤‚ कि बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध देना सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं।
नवजात शिशॠको गाय का दूध पिलाना चाहिठया नहीं? |
नवजात शिशॠको गाय का दूध नहीं पिलाना चाहिà¤à¥¤ अमेरिकन à¤à¤•ेडमी ऑफ पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, à¤à¤• साल से छोटे शिशॠको गाय का दूध पिलाना नà¥à¤•सानदायक हो सकता है। इसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, सोडियम और पोटैशियम अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में होते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पचाना शिशॠके लिठमà¥à¤¶à¥à¤•िल हो सकता है। साथ ही शिशॠके शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ विकास के लिठआवशà¥à¤¯à¤• विटामिन-ई, आयरन और जरूरी फैटी à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की दूध में कमी होती है (1)। खासकर, गाय के दूध में आयरन की कमी होती है, जिस कारण नवजात को à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ की शिकायत हो सकती है (12)। इसी वजह से नवजात शिशॠको सिरà¥à¤« मां का दूध या आयरन यà¥à¤•à¥à¤¤ फॉरà¥à¤®à¥‚ला मिलà¥à¤• पिलाने की सलाह दी जाती है (1)।
आगे जानिठकि बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध कब पिला सकते हैं।
आप किस उमà¥à¤° से अपने बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध देना शà¥à¤°à¥‚ कर सकती हैं?
अमेरिकन à¤à¤•ेडमी ऑफ पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤•à¥â€à¤¸ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जब शिशॠà¤à¤• साल का हो जाà¤, तो उसे गाय का दूध पिलाना शà¥à¤°à¥‚ किया जा सकता है। à¤à¤• से दो साल तक के बचà¥à¤šà¥‡ को फà¥à¤² फैट गाय का दूध देना फायदेमंद होता है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह बचà¥à¤šà¥‡ के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास में मदद कर सकता है। जब बचà¥à¤šà¤¾ दो साल का हो जाà¤, तो उसे कम फैट वाला गाय का दूध à¤à¥€ दिया जा सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ को कम फैट वाला दूध तà¤à¥€ दें अगर उसका वजन जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हो। अनà¥à¤¯à¤¥à¤¾ तीन साल के बाद à¤à¥€ फà¥à¤² फैट दूध दिया जा सकता है (3)।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में जानेंगे कि बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध किस तरह पिलाया जा सकता है।
बचà¥à¤šà¥‡ को गाय का दूध कैसे पिलाà¤à¤‚?
बचà¥à¤šà¥‡ को मां का दूध पीने की आदत होती है। à¤à¤¸à¥‡ में हो सकता है कि शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में उसे गाय का दूध पसंद न आà¤à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ में आप उसे धीरे-धीरे गाय के दूध की आदत डलवाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं। इसके लिठइन तरीकों को अपनाया जा सकता है।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में दिनà¤à¤° में à¤à¤• बार कम मातà¥à¤°à¤¾ में गाय का दूध पिलाà¤à¤‚।
फिर धीरे-धीरे इसकी मातà¥à¤°à¤¾ को बढ़ाà¤à¤‚ और दिन में दो बार बचà¥à¤šà¥‡ को दूध दें।
बचà¥à¤šà¥‡ को रंगीन कटोरी या सिपà¥à¤ªà¤° पसंद है, तो उसमें दूध डालकर दें। à¤à¤¸à¤¾ करने से वह दूध पीने में दिलचसà¥à¤ªà¥€ दिखाà¤à¤—ा।
अगर आपने बचà¥à¤šà¥‡ को डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚ट देना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया है, तो विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚ट के पाउडर जैसे बादाम या इलाइची मिलाकर उसे दूध पिला सकते हैं।
बीच-बीच में बचà¥à¤šà¥‡ को सादा दूध à¤à¥€ पिलाà¤à¤‚ वरना उसे फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤° वाले दूध की आदत लग जाà¤à¤—ी और वो सादा दूध नहीं पिà¤à¤—ा।
अगर आप बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाय के दूध के फायदे जानना चाहते हैं, तो पढ़ें लेख का अगला à¤à¤¾à¤—।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाय के दूध के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लाà¤
गाय का दूध बचà¥à¤šà¥‡ के लिठविà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तरीकों से लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• हो सकता है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है :
हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का विकास : उबले हà¥à¤ और फॉरà¥à¤Ÿà¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ (अतिरिकà¥à¤¤ पोषक ततà¥à¤µ मिलाया हà¥à¤†) गाय के दूध में समृदà¥à¤§ मातà¥à¤°à¤¾ में विटामिन-डी और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® होते हैं (4)। ये दोनों ही विटामिन और मिनरल बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं (5)।
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास : गाय के दूध में मौजूद फैट बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• विकास में सहायक हो सकता है (3)।
संपूरà¥à¤£ विकास : गाय के दूध में à¤à¤¸à¥‡ कई माइकà¥à¤°à¥‹à¤¨à¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤à¤‚टà¥à¤¸ और पोषक ततà¥à¤µ जैसे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ व फैट आदि पाठजाते हैं, तो बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤¨à¥‡ और उससे संपूरà¥à¤£ विकास में सहायक हो सकते हैं (6)।
ऊरà¥à¤œà¤¾ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ : गाय के दूध में लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ की अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ होती है। लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ दूध में मौजूद मà¥à¤–à¥à¤¯ कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ होता है, जिसे ऊरà¥à¤œà¤¾ का सà¥à¤°à¥‹à¤¤ माना जाता है। यह बचà¥à¤šà¥‡ को ऊरà¥à¤œà¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने के साथ ही मानसिक विकास और आंत में अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के अवशोषण में सहायक हो सकता है (7)।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाय के दूध लाठके बाद इसकी सही मातà¥à¤°à¤¾ के बारे में लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में जानिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ कितना गाय का दूध देना चाहिà¤?
बचà¥à¤šà¥‡ को गाय के दूध का कितना सेवन करना चाहिà¤, यह उसकी उमà¥à¤° पर निरà¥à¤à¤° करता है। इसके बारे में हमने नीचे विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताया है (3) :
à¤à¤• साल के बचà¥à¤šà¥‡ को दिनà¤à¤° में à¤à¤• कप दूध थोड़ा-थोड़ा करके दे सकते हैं।
दो से तीन साल के बचà¥à¤šà¥‡ को दो कप (लगà¤à¤— 480 मिलीलीटर) पिलाया जा सकता है।
चार से आठसाल के बचà¥à¤šà¥‡ को ढाई कप (लगà¤à¤— 600 मिलीलीटर) दूध दे सकते हैं।
फायदे के साथ ही बचà¥à¤šà¥‡ के लिठगाय के दूध के नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं, जिसके बारे में आगे बताया गया है।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाय के दूध के नà¥à¤•सान
हर चीज के फायदे के साथ नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं और इसी तरह बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाय के दूध के नà¥à¤•सान à¤à¥€ हो सकते हैं। कà¥à¤› बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गाय के दूध में मौजूद लेकà¥à¤Ÿà¥‹à¤¸ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है, जिसके कारण नीचे बताई गई समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं (2) :
पेट में दरà¥à¤¦ और अकड़न
उलà¥à¤Ÿà¥€ और मतली
डायरिया
आंत में रकà¥à¤¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤µ, जो à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ का कारण बन सकता है।
इसके अलावा, गाय के कचà¥à¤šà¥‡ दूध में कà¥à¤› बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और कीटाणॠपाठजाते हैं, जो बचà¥à¤šà¥‡ की सेहत के लिठहानिकारक और घातक हो सकते हैं। इस कारण हमेशा दूध को उबाल कर ही उसका सेवन करने की सलाह दी जाती है (4)।
आगे आप जानेंगे कि बचà¥à¤šà¤¾ दूध पीने से मना करे, तो कà¥à¤¯à¤¾ करना चाहिà¤à¥¤
अगर आपका बचà¥à¤šà¤¾ गाय का दूध पीने से इनकार करता है तो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
कई बार बचà¥à¤šà¥‡ गाय का दूध पीने में आनाकानी कर सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ में आप नीचे बताठगठतरीकों से उसे दूध पिलाने की कोशिश कर सकते हैं। सबसे पहले, अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गायों के दूध के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ अनिचà¥à¤›à¤¾ के कारण का पता लगाने की कोशिश करें, अगर पेट में दरà¥à¤¦, सूजन आदि जैसी कोई असà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ दिखाई देती है, तो बचà¥à¤šà¥‡ को इसे देने से बचें। यदि आपका बचà¥à¤šà¤¾ अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•ार के दूध को à¤à¥€ नहीं पचा पा रहा है, तो कृपया लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤œ इनटॉलेरेंस की जांच करें। यदि यह सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के बारे में है तो आप धीरे-धीरे सà¥à¤µà¤¾à¤¦ विकसित करने के लिठनिमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित टà¥à¤°à¤¿à¤• आजमा सकते हैं
दूध को हलà¥à¤•ा-सा गरà¥à¤® कर लें। हो सकता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को ठंडे दूध का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ अचà¥à¤›à¤¾ न लगे और गरà¥à¤® करने के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वह अचà¥à¤›à¤¾ लग जाà¤à¥¤
अगर बचà¥à¤šà¥‡ को दूध का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ पसंद न आà¤, तो आप उसमें केला या अनà¥à¤¯ फà¥à¤°à¥‚ट डालकर मिलà¥à¤•शेक बनाकर उसे पिला सकते हैं। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के दूध में कोई à¤à¥€ फà¥à¤²à¥‡à¤µà¤° मिलाने से पहले पीडियाटà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨ से परामरà¥à¤¶ अवशà¥à¤¯ कर लें।
बचà¥à¤šà¥‡ को विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ डिजाइन और आकार के सिपà¥à¤ªà¥€ कप में दूध दें।
बचà¥à¤šà¥‡ को दूध पीने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इनाम और शाबाशी दें। धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि बचà¥à¤šà¥‡ को इनाम की आदत न लगे।
जब à¤à¥€ बचà¥à¤šà¤¾ दूध पूरा खतà¥à¤® कर दें, तो उसकी तारीफ जरूर करें।
बचà¥à¤šà¥‡ को समà¤à¤¾à¤à¤‚ कि दूध पीने से उसकी हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और मासपेशियां मजबूत होंगी।
दूध में डà¥à¤°à¤¾à¤ˆ फà¥à¤°à¥‚टà¥à¤¸ मिलाकर दूध को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक रूप से मीठा बनाकर बचà¥à¤šà¥‡ को पिला सकते हैं।
आगे जानिठकि बचà¥à¤šà¥‡ को कैसा दूध देना चाहिà¤à¥¤
शिशॠको गाय का वसा यà¥à¤•à¥à¤¤ (फà¥à¤² कà¥à¤°à¥€à¤®) दूध देना चाहिठया फिर मलाई रहित (टोंड) दूध?
बचà¥à¤šà¥‡ वसा यà¥à¤•à¥à¤¤ (होल मिलà¥à¤•) दूध का सेवन कर सकते हैं। इसके बाकी पोषक ततà¥à¤µ टोंड मिलà¥à¤• की तरह ही होते हैं, बस फरà¥à¤• यह होता है कि इसमें फैट की मातà¥à¤°à¤¾ अधिक होती है (4)। à¤à¤•-दो साल तक बचà¥à¤šà¥‡ को वसा यà¥à¤•à¥à¤¤ दूध दे सकते हैं और दो साल के बाद बचà¥à¤šà¥‡ को दोनों तरह का दूध दिया जा सकता है (3)। हां, अगर बचà¥à¤šà¥‡ को किसी तरह की शारीरिक समसà¥à¤¯à¤¾ है, तो उसे दूध देने से पहले à¤à¤• बार बाल रोग विशेषजà¥à¤ž से परामरà¥à¤¶ ले सकते हैं।
गाय का दूध दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में à¤à¤• पसंदीदा पेय पदारà¥à¤¥ है और सà¤à¥€ को इसका सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन नवजात शिशॠके लिठइसका उपयोग हानिकारक हो सकता है। हां, à¤à¤• साल के बाद इसे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में शामिल किया जा सकता है और इस लेख को पà¥à¤•र आप समठगठहोंगे कि यह कैसे करना है। गाय के दूध का उपयोग करने के बाद अगर बचà¥à¤šà¥‡ को किसी तरह की असहजता होती है, तो तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ करें। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ à¤à¤¸à¥€ ही जानकारियों के लिठमॉमजंकà¥à¤¶à¤¨ की वेबसाइट पर विजिट करते रहें।
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